ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 115115.18महाभारत 115.18प्रत्युच्यमानस्तु हि भूय एभि;र्निशाम्य मा भूस्त्वमथार्तरूपः उच्चस्य नीचेन हि संप्रयोगं; विगर्हयन्ति स्थिरबुद्धयो येपिछलाअगलापूरा अध्याय