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महाभारत 107.4

मुनिरुवाच
उपपन्नस्त्वमेतेन यथा क्षत्रिय भाषसे
प्रकृत्या ह्युपपन्नोऽसि बुद्ध्या चाद्भुतदर्शन

पूरा अध्याय