ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 105105.32महाभारत 105.32ईर्ष्यातिच्छेदसंपन्ना राजन्पुरुषमानिनः कच्चित्त्वं न तथा प्राज्ञ मत्सरी कोसलाधिपपिछलाअगलापूरा अध्याय