ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 105105.29महाभारत 105.29यथा लब्धोपपन्नार्थस्तथा कौसल्य रंस्यसे कच्चिच्छुद्धस्वभावेन श्रिया हीनो न शोचसिपिछलाअगलापूरा अध्याय