ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 104104.48महाभारत 104.48पृथगेत्य समश्नाति नेदमद्य यथाविधि आसने शयने याने भावा लक्ष्या विशेषतःपिछलाअगलापूरा अध्याय