Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 103.23

संसर्पणाद्धि सेनाया भयं भीरून्प्रबाधते
वज्रादिव प्रज्वलितादियं क्व नु पतिष्यति

पूरा अध्याय