ग्रंथमहाभारतशान्तिपर्वअध्याय 103103.18महाभारत 103.18अपामिव महावेगस्त्रस्ता मृगगणा इव दुर्निवार्यतमा चैव प्रभग्ना महती चमूःपिछलाअगलापूरा अध्याय