ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 9292.31महाभारत 92.31यक्षी वा पन्नगी वापि मानुषी वा सुमध्यमे या वा त्वं सुरगर्भाभे भार्या मे भव शोभनेपिछलाअगलापूरा अध्याय