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महाभारत 9.14

धर्मराज उवाच
प्रमद्वरा रुरोर्भार्या देवदूत यदीच्छसि
उत्तिष्ठत्वायुषोऽर्धेन रुरोरेव समन्विता

पूरा अध्याय