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महाभारत 87.10

अष्टक उवाच
तांस्ते ददामि मा प्रपत प्रपातं; ये मे लोका दिवि राजेन्द्र सन्ति
यद्यन्तरिक्षे यदि वा दिवि श्रिता;स्तानाक्रम क्षिप्रममित्रसाह

पूरा अध्याय