Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 73.33

इति मामाह शर्मिष्ठा दुहिता वृषपर्वणः
क्रोधसंरक्तनयना दर्पपूर्णा पुनः पुनः

पूरा अध्याय