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महाभारत 72.21

वैशंपायन उवाच
एवमुक्त्वा द्विजश्रेष्ठो देवयानीं कचस्तदा
त्रिदशेशालयं शीघ्रं जगाम द्विजसत्तमः

पूरा अध्याय