महाभारत 71.6
जिगीषया ततो देवा वव्रिरेऽऽङ्गिरसं मुनिम्
पौरोहित्येन याज्यार्थे काव्यं तूशनसं परे
ब्राह्मणौ तावुभौ नित्यमन्योन्यस्पर्धिनौ भृशम्
जिगीषया ततो देवा वव्रिरेऽऽङ्गिरसं मुनिम्
पौरोहित्येन याज्यार्थे काव्यं तूशनसं परे
ब्राह्मणौ तावुभौ नित्यमन्योन्यस्पर्धिनौ भृशम्