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महाभारत 71.55

मया चेमां विप्रधर्मोक्तिसीमां; मर्यादां वै स्थापितां सर्वलोके
सन्तो विप्राः शुश्रुवांसो गुरूणां; देवा लोकाश्चोपशृण्वन्तु सर्वे

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