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महाभारत 65.16

दुःषन्त उवाच
ऊर्ध्वरेता महाभागो भगवाँल्लोकपूजितः
चलेद्धि वृत्ताद्धर्मोऽपि न चलेत्संशितव्रतः

पूरा अध्याय