ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 6060.57महाभारत 60.57शुकी विजज्ञे धर्मज्ञ शुकानेव मनस्विनी कल्याणगुणसंपन्ना सर्वलक्षणपूजितापिछलाअगलापूरा अध्याय