ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 5757.92महाभारत 57.92तथैव वेद्यां कृष्णापि जज्ञे तेजस्विनी शुभा विभ्राजमाना वपुषा बिभ्रती रूपमुत्तमम्पिछलाअगलापूरा अध्याय