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महाभारत 41.12

पितर ऊचुः
ऋद्धो भवान्ब्रह्मचारी यो नस्त्रातुमिहेच्छति
न तु विप्राग्र्य तपसा शक्यमेतद्व्यपोहितुम्

पूरा अध्याय