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महाभारत 37.10

सूत उवाच
श्रुत्वैवमृषिपुत्रस्तु दिवं स्तब्ध्वेव विष्ठितः
कोपसंरक्तनयनः प्रज्वलन्निव मन्युना

पूरा अध्याय