ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 3636.17महाभारत 36.17भो भो ब्रह्मन्नहं राजा परिक्षिदभिमन्युजः मया विद्धो मृगो नष्टः कच्चित्त्वं दृष्टवानसिपिछलाअगलापूरा अध्याय