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महाभारत 30.10

शक्र उवाच
वाक्येनानेन तुष्टोऽहं यत्त्वयोक्तमिहाण्डज
यदिच्छसि वरं मत्तस्तद्गृहाण खगोत्तम

पूरा अध्याय