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महाभारत 3.70

मुखेन गर्भं लभतां युवानौ; गतासुरेतत्प्रपदेन सूते
सद्यो जातो मातरमत्ति गर्भ;स्तावश्विनौ मुञ्चथो जीवसे गाः

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