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महाभारत 3.34

स उपाध्यायवचनादरक्षद्गाः
स चाहनि गा रक्षित्वा दिवसक्षयेऽभ्यागम्योपाध्यायस्याग्रतः स्थित्वा नमश्चक्रे

पूरा अध्याय