ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 33.182महाभारत 3.182एवमुक्तस्तु विप्रेण स राजा प्रत्युवाच ह जनमेजयः प्रसन्नात्मा सम्यक्संपूज्य तं मुनिम्पिछलाअगलापूरा अध्याय