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महाभारत 223.16

द्रोण उवाच
सूर्यो भूत्वा रश्मिभिर्जातवेदो; भूमेरम्भो भूमिजातान्रसांश्च
विश्वानादाय पुनरुत्सर्गकाले; सृष्ट्वा वृष्ट्या भावयसीह शुक्र

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