Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 192.27

सपत्नवृद्धिं यत्तात मन्यसे वृद्धिमात्मनः
अभिष्टौषि च यत्क्षत्तुः समीपे द्विपदां वर

पूरा अध्याय