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महाभारत 190.14

इदं च तत्राद्भुतरूपमुत्तमं; जगाद विप्रर्षिरतीतमानुषम्
महानुभावा किल सा सुमध्यमा; बभूव कन्यैव गते गतेऽहनि

पूरा अध्याय