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महाभारत 189.26

आगन्तारः पुनरेवेन्द्रलोकं; स्वकर्मणा पूर्वजितं महार्हम्
सर्वं मया भाषितमेतदेवं; कर्तव्यमन्यद्विविधार्थवच्च

पूरा अध्याय