Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 176.21

अग्राम्यसमवच्छन्नैरगुरूत्तमवासितैः
हंसाच्छवर्णैर्बहुभिरायोजनसुगन्धिभिः

पूरा अध्याय