ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 1717.18महाभारत 17.18एवं सुतुमुले युद्धे वर्तमाने भयावहे नरनारायणौ देवौ समाजग्मतुराहवम्पिछलाअगलापूरा अध्याय