ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 160160.31महाभारत 160.31एवं स तर्कयामास रूपद्रविणसंपदा कन्यामसदृशीं लोके नृपः संवरणस्तदापिछलाअगलापूरा अध्याय