ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 154154.23महाभारत 154.23द्रोण उवाच प्रार्थयामि त्वया सख्यं पुनरेव नराधिप अराजा किल नो राज्ञः सखा भवितुमर्हतिपिछलाअगलापूरा अध्याय