ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 150150.11महाभारत 150.11तस्य व्यवसितस्त्यागो बुद्धिमास्थाय कां त्वया कच्चिन्न दुःखैर्बुद्धिस्ते विप्लुता गतचेतसःपिछलाअगलापूरा अध्याय