ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 147147.18महाभारत 147.18त्वयि त्वरोगे निर्मुक्ते क्लेशादस्मात्सबान्धवे अमृते वसती लोके भविष्यामि सुखान्वितापिछलाअगलापूरा अध्याय