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महाभारत 126.34

दुर्योधन उवाच
आचार्य त्रिविधा योनी राज्ञां शास्त्रविनिश्चये
तत्कुलीनश्च शूरश्च सेनां यश्च प्रकर्षति

पूरा अध्याय