Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 124.7

क्षत्तर्यद्गुरुराचार्यो ब्रवीति कुरु तत्तथा
न हीदृशं प्रियं मन्ये भविता धर्मवत्सल

पूरा अध्याय