ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 123123.20महाभारत 123.20स तु श्वा शरपूर्णास्यः पाण्डवानाजगाम ह तं दृष्ट्वा पाण्डवा वीरा विस्मयं परमं ययुःपिछलाअगलापूरा अध्याय