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महाभारत 122.2

द्रुपद उवाच
अकृतेयं तव प्रज्ञा ब्रह्मन्नातिसमञ्जसी
यन्मां ब्रवीषि प्रसभं सखा तेऽहमिति द्विज

पूरा अध्याय