ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 114114.47महाभारत 114.47ब्रह्मचारी बहुगुणः सुपर्णश्चेति विश्रुतः विश्वावसुर्भुमन्युश्च सुचन्द्रो दशमस्तथापिछलाअगलापूरा अध्याय