ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 112112.2महाभारत 112.2न मामर्हसि धर्मज्ञ वक्तुमेवं कथंचन धर्मपत्नीमभिरतां त्वयि राजीवलोचनपिछलाअगलापूरा अध्याय