Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 111.34

पुष्पेण प्रयता स्नाता निशि कुन्ति चतुष्पथे
वरयित्वा द्विजं सिद्धं हुत्वा पुंसवनेऽनलम्

पूरा अध्याय