ग्रंथमहाभारतआदिपर्वअध्याय 110110.30महाभारत 110.30त्यक्तग्राम्यसुखाचारस्तप्यमानो महत्तपः वल्कली फलमूलाशी चरिष्यामि महावनेपिछलाअगलापूरा अध्याय