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महाभारत 109.31

वैशंपायन उवाच
एवमुक्त्वा सुदुःखार्तो जीवितात्स व्ययुज्यत
मृगः पाण्डुश्च शोकार्तः क्षणेन समपद्यत

पूरा अध्याय