श्रीमद्भगवद्गीता 16.15
आढ्योऽभिजनवानस्मि कोऽन्योऽस्ति सदृशो मया।यक्ष्ये दास्यामि मोदिष्य इत्यज्ञानविमोहिताः।।16.15।।
सरल अर्थ, AI द्वारा लिखा गयामैं सर्वोच्च, सर्वश्रेष्ठ हूँ; मुझ जैसा कोई नहीं। अज्ञान में मोहित लोग सोचते हैं कि वे मुझे रक्षित, दास और आनंदित कर सकते हैं।