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अथर्ववेद 8.4

यः कृ॒णोति॑ प्र॒मोत॑म॒न्धं कृ॒णोति॒ पूरु॑षम्।
सर्वं॑ शीर्ष॒ण्यंऽ ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे ॥४॥

पूरा अध्याय