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अथर्ववेद 8.14

या हृद॑यमुप॒र्षन्त्य॑नुत॒न्वन्ति॒ कीक॑साः ।
अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म् ॥१४॥

पूरा अध्याय