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अथर्ववेद 5.18

अ॒जः प॒क्वः स्व॒र्गे लो॒के द॑धाति॒ पञ्चौ॑दनो॒ निरृ॑तिं॒ बाध॑मानः ।
तेन॑ लो॒कान्त्सूर्य॑वतो जयेम ॥१८॥

पूरा अध्याय