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अथर्ववेद 2.17

यत् क्षु॒रेण॑ म॒र्चय॑ता सुते॒जसा॒ वप्ता॒ वप॑सि केशश्म॒श्रु।
शुभं॒ मुखं॒ मा न॒ आयुः॒ प्र मो॑षीः ॥१७॥

पूरा अध्याय