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अथर्ववेद 86.1

त्रा॒तार॒मिन्द्र॑मवि॒तार॒मिन्द्रं॒ हवे॑हवे सु॒हवं॒ शूर॒मिन्द्र॑म्।
हु॒वे नु श॒क्रं पु॑रुहू॒तमिन्द्रं॑ स्व॒स्ति न॒ इन्द्रो॑ म॒घवा॑न् कृणोतु ॥१॥

पूरा अध्याय