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अथर्ववेद 81.4

द॒र्शोऽसि दर्श॒तोऽसि॒ सम॑ग्रोऽसि॒ सम॑न्तः ।
सम॑ग्रः॒ सम॑न्तो भूयासं॒ गोभि॒रश्वैः॑ प्र॒जया॑ प॒शुभि॑र्गृहैर्धने॑न ॥४॥

पूरा अध्याय